नासा ने की थी मिशन शक्ति की आलोचना फिर भी करेगा इसरो के साथ काम
कुछ दिनों पहले ही भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रह में भेदी मिसाइल का सफल परीक्षण किया। ऐसा करने वाले देशों में भारत विश्व का चौथा देश बन गया है। इसके पहले अमेरिका और रूस, चीन ने इस तरह की कामयाबी हासिल कर ली है। अंतरिक्ष में लक्ष्य को भेदने की क्षमता हासिल करने के बाद भारत विश्व की उन महा शक्तियों में शुमार हो गया है जो अंतरिक्ष में अपने दुश्मन के सेटेलाइट को नष्ट कर सकते हैं। कुछ दिनों पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के चेयरमैन जेम्स ब्रिडेनस्टाइन ने भारत के इस कदम की आलोचना की थी और कहा था कि इससे अंतरिक्ष में काफी मलवा पैदा हो गया है और यह एक भयानक चीज़ है। मगर इसरो की आलोचना करने के बाद भी आगे इसरो के साथ काम करना जारी रखेगा।
नासा के चेयरमैन जेम्स ब्रिडेनस्टाइन ने इसरो के अध्यक्ष के सिवान को एक पत्र लिखा और कहा कि व्हाइट हाउस से मिले दिशा निर्देशों के अनुसार नासा आगे भी मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजने जैसे कार्यों को लेकर इसरो के साथ काम करने को लेकर बेहद उत्साहित है। नासा इसरो के साथ ह्यूमन स्पेसफ्लाइट वर्किंग, प्लेनेटरी साइंस वर्किंग ग्रुप , यूएस इंडिया अर्थ साइंस वर्किंग ग्रुप मैं साथ जुड़कर काम करना बरकरार रखेंगे।
ब्रिडेनस्टाइन ने इसरो को लिखे गए खत में बताया है कि इसके पहले नासा ने इसरो को मानव को अंतरिक्ष में भेजने के लिए नासा के सहयोग को बंद करने को कहा गया था। मगर अब व्हाइट हाउस के हस्तक्षेप के बाद यह तय हो गया है कि आगे भी दोनों संगठन साथ मिलकर अंतरिक्ष और ब्रह्मांड से जुड़े कार्यों में एक दूसरे का सहयोग करते रहेंगे। इसके पहले एक टाउन हॉल में नासा ने भारत के अंतरिक्ष भेदी उपग्रह मिसाइल परीक्षण की आलोचना की थी और कहा था इससे अंतरिक्ष में बहुत मलबा जमा हो गया है। जो कि अंतर आक्षी अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए खतरा बन जाएगा।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



